मनुज देपावत रो जन-गीत "धोरां वाला देश जाग रे"

15 टिप्‍पणियां:

  1. हिन्दी ब्लॉगजगत के स्नेही परिवार में इस नये ब्लॉग का और आपका मैं ई-गुरु राजीव हार्दिक स्वागत करता हूँ.

    मेरी इच्छा है कि आपका यह ब्लॉग सफलता की नई-नई ऊँचाइयों को छुए. यह ब्लॉग प्रेरणादायी और लोकप्रिय बने.

    यदि कोई सहायता चाहिए तो खुलकर पूछें यहाँ सभी आपकी सहायता के लिए तैयार हैं.

    शुभकामनाएं !


    "टेक टब" - ( आओ सीखें ब्लॉग बनाना, सजाना और ब्लॉग से कमाना )

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  2. आपका लेख पढ़कर हम और अन्य ब्लॉगर्स बार-बार तारीफ़ करना चाहेंगे पर ये वर्ड वेरिफिकेशन (Word Verification) बीच में दीवार बन जाता है.
    आप यदि इसे कृपा करके हटा दें, तो हमारे लिए आपकी तारीफ़ करना आसान हो जायेगा.
    इसके लिए आप अपने ब्लॉग के डैशबोर्ड (dashboard) में जाएँ, फ़िर settings, फ़िर comments, फ़िर { Show word verification for comments? } नीचे से तीसरा प्रश्न है ,
    उसमें 'yes' पर tick है, उसे आप 'no' कर दें और नीचे का लाल बटन 'save settings' क्लिक कर दें. बस काम हो गया.
    आप भी न, एकदम्मे स्मार्ट हो.
    और भी खेल-तमाशे सीखें सिर्फ़ "टेक टब" (Tek Tub) पर.
    यदि फ़िर भी कोई समस्या हो तो यह लेख देखें -


    वर्ड वेरिफिकेशन क्या है और कैसे हटायें ?

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  3. गीत सुन देख कर आनन्द आ गया.........

    स्वागत है

    हार्दिक शुभ कामनाएं

    -अलबेला खत्री

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  4. Rajeev, this is not a HINDI blog... this is RAJASTHANI BLOG sir... please make correction in your wordings.

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  5. बहुत बढ़िया है सा आप इन दुनिया में उजाला रो कोम करो हो सा
    मारी शुभकामना आपरे साथै है और में भी इण जाग्रति ने आगे फेलौला

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  6. नहीं नहीं, राजस्थानी भाषा और हिंदी भाषा एक ही है

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  7. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  8. युगलजी,
    यूं तो दुनिया की समस्त भाषाएं एक ही हैं, मगर अपनी व्याकरणिक विशिष्टताओं के कारण राजस्थानी और हिन्दी पूर्णतया अलग-अलग भाषाएं हैं। ठीक वैसे ही जैसे पंजाबी, गुजराती, मराठी, बंगला आदि।
    -सत्यनारायण सोनी, प्राध्यापक (हिन्दी)

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  9. बहुत ही शानदार ब्लॉग है. इसके लिए बधाई और शुभ कामनाएं .

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  10. i am also rajshthani lit student. i like it blogspot. in ba or bed i had been rajsthani subject.

    vijay singh
    lohalhan new basti ajmer (raj.)

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  11. " बाज़ार के बिस्तर पर स्खलित ज्ञान कभी क्रांति का जनक नहीं हो सकता "

    हिंदी चिट्ठाकारी की सरस और रहस्यमई दुनिया में राज-समाज और जन की आवाज "जनोक्ति.कॉम "आपके इस सुन्दर चिट्ठे का स्वागत करता है . चिट्ठे की सार्थकता को बनाये रखें . अपने राजनैतिक , सामाजिक , आर्थिक , सांस्कृतिक और मीडिया से जुडे आलेख , कविता , कहानियां , व्यंग आदि जनोक्ति पर पोस्ट करने के लिए नीचे दिए गये लिंक पर जाकर रजिस्टर करें . http://www.janokti.com/wp-login.php?action=register,
    जनोक्ति.कॉम www.janokti.com एक ऐसा हिंदी वेब पोर्टल है जो राज और समाज से जुडे विषयों पर जनपक्ष को पाठकों के सामने लाता है . हमारा या प्रयास रोजाना 400 नये लोगों तक पहुँच रहा है . रोजाना नये-पुराने पाठकों की संख्या डेढ़ से दो हजार के बीच रहती है . 10 हजार के आस-पास पन्ने पढ़े जाते हैं . आप भी अपने कलम को अपना हथियार बनाइए और शामिल हो जाइए जनोक्ति परिवार में !

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  12. सोनीजी; घणो आनंद आयो इण गीत ने सुण ने. आपरो घणो घणो धन्यवाद म्हने म्हारे गाँव पचपदरा री याद आयगी. थे अंदाजो कोनी लगा सको के म्हने कित्ती ख़ुशी हुई है आज. एक बार पाछो धन्यवाद. इण तरह और लोकगीतों री बात जोवोंलोसा. घणी खमा
    www.nareshnashaad.blogspot.com

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  13. धोरां वाळौ देस तौ जाग्यौड़ौ छै. धोरां वाळा देस रा लोग सो ग्या

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  14. Is very ko sun nahi paa raha Hun.kripya dubara kisi aur format me upload kijiyr

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  15. Bahut hi shandar geet hai, par is format me sun nahi paa raha Hun.kripya dobara upload late

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